वट सावित्री व्रत — Vat Savitri: विधि और कथा

Suhaag ki raksha ka vrat — Vat Savitri puja vidhi aur Savitri katha.

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वट सावित्री व्रत सुहागिन स्त्रियाँ पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं। इसमें वट (बरगद) वृक्ष की पूजा होती है, जो दीर्घायु व अटलता का प्रतीक है।

कबज्येष्ठ अमावस्या/पूर्णिमा (मई–जून)
वृक्षवट (बरगद)
आधारसावित्री-सत्यवान कथा

पूजा विधि

  1. व्रत का संकल्प लेकर वट वृक्ष के पास जाएँ।
  2. वृक्ष को जल, अक्षत, रोली व पुष्प अर्पित करें।
  3. कच्चे सूत को वृक्ष के चारों ओर लपेटकर परिक्रमा करें।
  4. सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें और पति की दीर्घायु की प्रार्थना करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न / FAQ

वट वृक्ष की पूजा क्यों?

बरगद दीर्घजीवी व अक्षय वृक्ष है; सावित्री ने इसी वृक्ष के नीचे यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे।

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