महाशिवरात्रि — Maha Shivratri: व्रत, रुद्राभिषेक और पूजा विधि
Bhagwan Shiv ki mahaan raatri — vrat, chaar prahar puja aur Rudrabhishek vidhi.
महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह तथा शिव के आदि-अनंत ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होने का पावन पर्व है। इस रात्रि जागरण, उपवास और चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है।
कबफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (फरवरी–मार्च)
देवताभगवान शिव
विशेषरात्रि जागरण, 4 प्रहर पूजा
व्रत एवं पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर "ॐ नमः शिवाय" का संकल्प लें और उपवास रखें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी व शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के पुष्प व चंदन अर्पित करें।
- चार प्रहर में चार बार पूजा कर शिव चालीसा व महामृत्युंजय जप करें।
- रात्रि जागरण कर अगले दिन पारण करें।
॥ ॐ नमः शिवाय ॥ · ॥ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ॥
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न / FAQ
शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाना चाहिए?
तुलसी, हल्दी, केतकी का फूल और नारियल का जल शिवलिंग पर वर्जित माने जाते हैं।
बेलपत्र का महत्व क्या है?
तीन दल वाला बेलपत्र त्रिदेव व शिव के तीन नेत्रों का प्रतीक है; इसे चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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