होली — Holi: रंगों का पर्व, होलिका दहन और पौराणिक कथा
Rango aur prem ka parv Holi — Holika Dahan, Prahlad katha aur significance.
होली रंगों, प्रेम और भाईचारे का पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इसकी पूर्व संध्या पर होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन धुलंडी पर रंग खेला जाता है।
कबफाल्गुन पूर्णिमा (मार्च)
संबंधप्रह्लाद–होलिका, राधा–कृष्ण
भागहोलिका दहन + धुलंडी
पौराणिक कथा
भक्त प्रह्लाद को उसके पिता हिरण्यकश्यप ने कई बार मारने का प्रयत्न किया। उसकी बुआ होलिका, जिसे अग्नि में न जलने का वरदान था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी — परंतु भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। यही होलिका दहन का आधार है।
होलिका दहन विधि
- शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल, भद्रा रहित) में लकड़ी-उपले की होली सजाएँ।
- जल, अक्षत, रोली, गुड़, नारियल व नई फसल के अन्न अर्पित करें।
- परिक्रमा कर होलिका का दहन करें और अग्नि को प्रणाम करें।
राधा–कृष्ण और रंग
ब्रज में होली राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का उत्सव है। बरसाना की लठमार होली विश्वप्रसिद्ध है। रंग प्रेम, समता और आनंद का प्रतीक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न / FAQ
होलिका दहन का मुहूर्त कैसे तय होता है?
फाल्गुन पूर्णिमा को प्रदोष काल में, भद्रा समाप्त होने के बाद दहन किया जाता है। पंचांग में सटीक समय देखें।
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