दीपावली — Diwali: लक्ष्मी पूजा, महत्व और मनाने की विधि
Prakash ka parv Diwali — Lakshmi-Ganesh puja, 5 din ka utsav aur vidhi.
दीपावली अर्थात "दीपों की पंक्ति" — अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व है। इसी दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे, और अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। यह पाँच दिनों का उत्सव है।
कबकार्तिक अमावस्या (अक्टूबर–नवंबर)
देवतालक्ष्मी–गणेश
अवधि5 दिन
मुख्य पूजालक्ष्मी पूजन (प्रदोष काल)
पाँच दिन का उत्सव
- धनतेरस — बर्तन/सोना-चाँदी खरीदना, धन्वंतरि व यम पूजन।
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — अभ्यंग स्नान, यमराज को दीपदान।
- दीपावली — मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजन, दीप प्रज्वलन।
- गोवर्धन पूजा / अन्नकूट — गिरिराज गोवर्धन की पूजा।
- भाई दूज — बहन-भाई के स्नेह का पर्व।
लक्ष्मी पूजन विधि (संक्षेप)
- घर की सफाई कर रंगोली व दीप सजाएँ।
- चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
- कलश, अक्षत, कमल पुष्प, मिठाई व दीप अर्पित करें।
- प्रदोष/स्थिर लग्न में पूजन कर लक्ष्मी चालीसा व आरती करें।
- तिजोरी, बही-खाता और मुख्य द्वार पर दीप रखें।
॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न / FAQ
लक्ष्मी पूजन का शुभ समय कौन सा है?
प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) और स्थिर लग्न (वृषभ) में लक्ष्मी पूजन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। सटीक मुहूर्त के लिए पंचांग देखें।
दिवाली पर दीप क्यों जलाते हैं?
दीप ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है; यह घर से नकारात्मकता दूर कर माँ लक्ष्मी का स्वागत करता है।
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