नवरात्रि 2026 — Navratri: महत्व, तिथि, घटस्थापना और पूजा विधि
Maa Durga ke nau roopon ki aaradhana ka parv — Navratri ka poora margdarshan.
नवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे पावन पर्व है, जिसमें नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — की पूजा की जाती है। वर्ष में मुख्यतः दो नवरात्रि आती हैं: चैत्र नवरात्रि (मार्च–अप्रैल) और शारदीय नवरात्रि (सितंबर–अक्टूबर)।
नवरात्रि का महत्व
नवरात्रि शक्ति की उपासना का पर्व है। यह असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। भक्त व्रत रखते हैं, कलश स्थापना करते हैं और नौ दिन देवी की आराधना कर आत्मशुद्धि तथा मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
घटस्थापना / कलश स्थापना विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान शुद्ध करें।
- मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ और उस पर जल से भरा कलश स्थापित करें।
- कलश पर आम के पत्ते, नारियल और मौली बाँधकर रखें।
- देवी की प्रतिमा/चित्र स्थापित कर दीप प्रज्वलित करें।
- संकल्प लेकर नौ दिन पूजा, दुर्गा सप्तशती/चालीसा पाठ का व्रत लें।
नौ दिन, नौ रंग
हर दिन देवी के एक रूप को समर्पित है और एक शुभ रंग से जुड़ा है। भक्त उस रंग के वस्त्र पहनकर देवी को प्रसन्न करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न / FAQ
नवरात्रि व्रत में क्या खाया जा सकता है?
फलाहार, कुट्टू/सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, आलू, सेंधा नमक और दूध-दही ग्रहण किए जाते हैं। अन्न, प्याज-लहसुन और सामान्य नमक वर्जित है।
कन्या पूजन कब होता है?
अष्टमी या नवमी के दिन 9 कन्याओं (और एक बालक/लांगुर) को भोजन कराकर उनका पूजन किया जाता है।
अखंड ज्योति क्या है?
नौ दिन निरंतर जलने वाला दीपक, जो देवी की उपस्थिति और भक्ति की निरंतरता का प्रतीक है।
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